चिंता और नकारात्मक सोच हमारे जीवन में बहुत ही गहरे और खतरनाक प्रभाव डालते है। जब भी हम कहते हे हमारा मूड ख़राब हे ,इसका मतलब हे की हमारे मन में जो चिंता और नकारात्मक वचार आ रहे हे उससे हम बहुत दुखी हे। और इस वजह से हम वो काम नहीं कर पाते जो हम करना चाहते हे। और हम उसी चिंता या नकारात्मक विचारो में डूबते चले जाते हे। अगर गहराई से अभ्यास किया जाए तो हम देखते हे की हम आज जो कुछ भी हे वो हमारे विचारो की वजह से हे। आप अपने आस पास के ऐसे कई इंसान देखते हे जो की पूरी तरह से स्वस्थ होते हे उनका चेहरा चमकता हुवा होता हे,उनकी शारीरिक उम्र जो हे उससे वो जवान दीखते हे, और जब आप उनके स्वाभाव का निरिक्षण करते हे तो पता चलता हे की वो बहुत खुश रहते हे उनके पास चिंता करने के कारण कम होते हे या तो उनका स्वाभाव ऐसा होता हे की वो सभी चीज़ो की बहुत कम चिंता करते हे। हम सब चाहते हे की हम भी इसी तरह के बने। तो यहाँ हम आपको ऐसी कुछ चीज़े बताने वाले हे जो आपके मूड को बिलकुल या तो कुछ हद तक अच्छा करने में मदद करेंगी।

1. साँसों की प्रक्रिया।

आपने ये नोट किया होगा की हमारी सभी भावनाओ का असर सीधा हमारी साँसों पर पड़ता हे। जब हम चिंता में होते हे तो हमारी साँसे छोटी और ज़्यादा गति की हो जाती हे। तो जब भी हम चिंता या खराब मूड महसूस करे अपनी साँसों को धीमा और गहरी कर दीजिये। 6 सेकंड्स एक सांस लेने में लगाइये और ६ सेकंड्स वो सांस छोड़ने में लगाइये।ऐसा करते वक्त अगर आँखों को बंध कर ले तो ज़्यादा बेहतर परिणाम मिलेंगे। ये 10 -15 बार करते ही आपका मूड अच्छा हो जायेगा। और सबसे बेहतरीन बात ये हे की ये प्रक्रिया आप किसी भी वक्त किसी भी परिस्थिति में कर सकते हे। चाहे आप ऑफिस में मीटिंग में हो,स्कूल में पढ़ रहे हो, या फिर कही पर बस या कार में जा रहे हो। ये अभ्यास आपका मूड चाहकर भी ख़राब नहीं होने देगा।

2. अपने ज़िन्दगी के बारे में लिखना।

विज्ञान ने साबित किया हे की जब हम अपने विचारो को कागज़ पर उतारते हे तो इसका बहुत ही सकारात्मक असर हमारे स्वाभाव पर पड़ता हे। इस लिए आपको आपकी ज़िन्दगी बेहतर बनाने के लिए रोज़ की 5 मिनट अपने बारे में लिखना चाहिए।

इसमें आपको क्या लिखना चाहीये।

  • अपने लक्ष्य के बारे में लिखना।
  • आपने उस लक्ष्य को पाने के लिए आज दिन भर में क्या किया वो लिखना।
  • आप अपने लक्ष्य को और बेहतरीन तरीके से कैसे पा सकते हो वो लिखना।
  • आप अपने दिन को और बेहतर कैसे बना सकते हो वो लिखना।

इस तरह से आपका ध्यान आने वाली मुसीबतो और चिंताओं से उठके अपने लक्ष्य के ऊपर आ जायेगा।इससे आप मनोमंथन कर सकोगे की आप अपनी ज़िन्दगी में क्या पाना चाहते हो और आप इसे कैसे प्राप्त कर सकते हो। तो ज़ाहिर हे आपको पता चल जायेगा की आपका लक्ष्य आपकी चिताओ से बड़ा हे तो आपका ध्यान चिंताओं से अलग होकर आपके लक्ष्य की तरफ आ जायेगा।

3. आभार का भाव।

हम सब अपनी ज़िन्दगी में ज़्यादा से ज़्यादा पाना चाहते हे। और इसी चक्कर में हमारे पास जो कुछ भी हे उसको हम नज़र अंदाज़ कर देते हे लेकिन अगर हम उन चीज़ो को महसूस करना शुरू करदे जो हमारे पास हे तो हमारी ज़िन्दगी हमें खूबसूरत लगने लगती हे। इस लिए हमें अपनी ज़िन्दगी में जो कुछ भी अच्छा हे अच्छा परिवार ,अच्छा स्वस्थ्य ,अच्छे दोस्त,अच्छे बच्चे अच्छे पडोसी,अच्छा स्वाभाव, अच्छा शरीर उनके लिए हमें ईश्वर से या जिस भी किसी भगवन या देवता को आप मानते हो आभार प्रकट करना चाहिए। ऐसा करने से हमें खुद अपने पास जो अमूल्य सम्पति हे उसका एहसास होता हे और हम उन चीज़ो के बारेमे कम चिंतित होते हे जो हमारे पास नहीं हे। विज्ञान ने तो ये साबित किया हे की ऐसा करने से इंसान को अपने अपने स्वस्थ्य पर अच्छा प्रभाव देखने को मिला हे। तो हर वो चीज़ जो आपकी ज़िन्दगी में हे उसके लिए भगवन को आभार प्रकट कीजिये। इसके लिए आप कोई भी समय चुन सकते हे पर सुबह का समय सर्व श्रेष्ट होता हे इस अभ्यास को अपने दैनिक जीवन में लाने से आपको अपनी ज़िन्दगी में, स्वाभाव में और अपने विचारो में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

4. वो करना जो आपको अच्छा लगता हो।

अब आप सोचेंगे पहले से ही खराब हे तो हम कैसे वो चीज़े कर सकते हे जो हमें पसंद हे। यही पर हम सब की सोच गलत हे। जब हम दुखी होते हे या मूड ऑफ होता हे तब हम ज़्यादा से ज़्यादा चिंता में बढ़ोतरी करने वाली चीज़े करते हे जैसे की अकेला रहना,समाज से कट कर रहना, दुखी गाने सुनना ,दुखी फिल्म देखना। ये सब चीज़े आपके मूड को और निचे ले जाती हे। जब हम दुखी अवस्था में होते हे तब हमें ऐसी चीज़े करनी चाहिए जो हमें खुश रखे जैसे की जोशीले गाने सुनना, अच्छी मूवी देखना,कॉमेडी शो देखना,जो खेल पसंद हो वो खेलना। इन सब चीज़ो से आपका शरीर और दिमाग हैप्पी केमिकल छोड़ेगा और आप अपने दुःख और ख़राब मूड से जल्दी निकल पाओगे।

5. कुदरत की और जाये।

जब हम हम इंसानो का इतिहास देखते हे तो हमें ये पता चलता हे की इंसान जैसे जैसे प्रकृति से विमुख होता गया हे वैसे वैसे ही चिंता और हताशा ने उसे घेर लिया हे। इसलिए जैसे ही हमें मौका मिले हमें प्राकृतिक वातावरण में चले जाना चाहिए। जब आप हताश और उदास महसूस करे तो कुदरत की गोद में चले जाइये नदी या समुन्दर किनारे बैठे,पर्वत पर घूम कर आइये, अपनी सोसायटी या फिर मुहल्ले के बगीचे में घूमिये, बिना जूतों के हरी घास पर चलिये। अगर कुछ भी ना हो तो अपने टेर्रेस पर जाइये और आसमान में उतड़े पंछीओ को निहारिये। आपको ज़रूर अच्छा महसूस होगा और आपकी हताशा कम हो जाएगी।

6. किसी करीबी दोस्त को फ़ोन करे या मिले।

जब हम हमारे जीवन के सबसे खुशनुमा पल याद करने की कोशिश करते हे तो हमें हमारे दोस्तों के साथ बिताया गया समय याद आता हे। हमारे दोस्त ही हे जिनके साथ हम सभी प्रकार की बाते खुलकर शेयर कर सकते हे। जब हम हमारे दोस्त से बात करते हे तो हम पुरानी बाते याद करते हेजो जो की हमारे जीवन के सबसे मज़ेदार पल थे। उन पलो को याद करके हम अपना दुःख भूल जाते हे और हमारा मूड सुधर जाता हे। सबके जीवन में ऐसे दोस्त होने चाहिए जो बिलकुल ही सीरियस टाइप के ना हो। ऐसे दोस्त हमारी परेशानियों को कुछ पल में हु भुला दे सकते हे।

7. ध्यान करे।

हमारी रोज़ की ज़िन्दगी में से परेशानी दूर करने का सबसे कारगर तरीका हे ‘ध्यान’. ध्यान ऐसी चीज़ हे जिसका अभ्यास रोज़ किया जाये तो ये आपकी ज़िन्दगी के हर पहलू को बदलकर रख देगा। ध्यान करने के लिए ज़मीं पर पालथी मारकर बैठ जाइये। या फिर आप ये खुर्सी पर सीधे बैठकर भी कर सकते हे। फिर आंखे बंद करके सिर्फ अपनी साँसों पर ध्यान दीजिये। दूसरे विचारो आने जाने दीजिये पर उनको पकड़के ना रखे जितना हो सके अपने शरीर को ढीला रखिये और अपनी साँसों पर ही ध्यान रखिये। ऐसा रोज़ १० मिनिट करने से आपका तनाव,आपका घटता चढ़ता मूड सब कंट्रोल में आ जायेगा।

आखिर में आपको ये कहना चाहूंगा की ज़िन्दगी तो कट ही रही हे। अब ये आपके हाथ में हे ज़िन्दगी में कितने पल खुश रहकर काटते हे कितने उदास रह कर काटते हे। ऊपर लिखे हर स्टेप आपकी उदासीनता को भगाने के लिए कारगर हे। हमारे आशा हे आप इन्हे आज़मायेंगे और हमेशा खुश रहेंगे।

जय हिन्द